पत्नी की मौत की खबर मिली, फिर भी अदालत में जारी रखी बहस; लंदन में 36 महीने का कोर्स 30 महीने में पूरा कर बने बैरिस्टर

राष्ट्रीय एकता दिवस पर देश सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती मना रहा है। भारत के पहले उप प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के रूप में उनकी भूमिका इतिहास में बेहद महत्वपूर्ण रही है। देश को एकजुट करने वाले लौह पुरुष सरदार पटेल का जीवन संघर्ष, दृढ़ इच्छाशक्ति और कर्तव्यनिष्ठा की मिसाल रहा। उनकी जिंदगी से जुड़ा एक ऐसा ही प्रसंग है, जब अदालत में मुकदमे की पैरवी के दौरान उन्हें पत्नी झावेरबा के निधन की खबर मिली, लेकिन उन्होंने अपनी जिम्मेदारी पूरी करने के बाद ही इस दुखद समाचार के बारे में दूसरों को बताया।

30 महीने में पूरा किया 36 महीने का कोर्स

सरदार वल्लभभाई पटेल का जन्म 31 अक्टूबर 1875 को गुजरात के नडियाद में एक किसान परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम जवेरभाई और माता का नाम लाडबा था। उन्होंने शुरुआती पढ़ाई करमसद के स्थानीय स्कूल में की और 1897 में नडियाद हाई स्कूल से मैट्रिक की परीक्षा पास की।

परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी, इसलिए उन्होंने महंगी विश्वविद्यालयी शिक्षा के बजाय डिस्ट्रिक्ट प्लीडर की परीक्षा पास की और वकालत करने का लाइसेंस हासिल किया। अगस्त 1910 में वे अपने बड़े भाई विट्ठलभाई पटेल की मदद और आगे की पढ़ाई के लिए इंग्लैंड रवाना हुए।

लंदन के मिडल टेम्पल में उन्होंने कानून की पढ़ाई शुरू की। यहां 36 महीने में पूरा होने वाला पाठ्यक्रम उन्होंने महज 30 महीने में पूरा कर लिया। परीक्षा में प्रथम श्रेणी हासिल करने के बाद वे 1913 में भारत लौटे और अहमदाबाद में वकालत शुरू की।

1893 में हुआ था झावेरबा से विवाह

वल्लभभाई पटेल का विवाह वर्ष 1893 में झावेरबा पटेल से हुआ था। इस दंपति के दो बच्चे थे। उनकी बेटी मणिबेन पटेल का जन्म 1904 में और बेटे डाह्याभाई पटेल का जन्म 1905 में हुआ था।

वर्ष 1909 में बीमारी के चलते झावेरबा को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इलाज के दौरान एक ऑपरेशन में उनका निधन हो गया। पत्नी के असमय चले जाने का यह दुख पटेल के जीवन की सबसे कठिन घटनाओं में से एक था।

अदालत में बहस के दौरान मिली पत्नी के निधन की खबर

झावेरबा के निधन से जुड़ा यह प्रसंग सरदार पटेल की कर्तव्यनिष्ठा और धैर्य को दर्शाता है। बताया जाता है कि जिस समय उनकी पत्नी का निधन हुआ, उस वक्त वे अदालत में एक मुकदमे की पैरवी कर रहे थे। बहस के बीच किसी व्यक्ति ने उनके हाथ में एक पर्ची थमाई। उसमें पत्नी के निधन की सूचना लिखी थी।

खबर पढ़ने के बाद भी पटेल ने अदालत में अपनी बहस नहीं रोकी। उन्होंने बिना किसी को कुछ बताए पर्ची अपनी जेब में रख ली और मुकदमे की पैरवी जारी रखी। जब केस की सुनवाई पूरी हो गई और वे मुकदमा जीत गए, तब उन्होंने वहां मौजूद लोगों को पत्नी के निधन की जानकारी दी।

यह घटना सुनकर अदालत में मौजूद लोग स्तब्ध रह गए। पत्नी के निधन के बाद वल्लभभाई पटेल ने दोबारा विवाह नहीं किया। उन्होंने अपना जीवन परिवार और देश की जिम्मेदारियों के बीच आगे बढ़ाया।

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